‘यमक अलंकार’
मम्मटानुसारं लक्षणम्-
“अर्थे सत्यर्थभिन्नानां वर्णानां सा पुनः श्रुतिः” (काव्यप्रकाशः,नवमः उल्लासः)
‘समरसमरसोऽयम्’ इत्यादावेकेषामर्थवत्त्वेऽन्येषामनर्थकत्वे भिन्नार्थानामिति न युज्यते वक्तुम्, इति ‘अर्थे सति’ इत्युक्तम्। सेति ‘सरो रस’ इत्यादिवैलक्षण्ये न, तेनैव क्रमेण स्थिता”।
हिन्दी अर्थ – अर्थ होने पर (नियम से) भिन्नार्थक वर्णों की उसी क्रम से [सा] पुनः श्रवण (पुनरावृत्ति) होने पर यमक नामक शब्दालंकार होता है।
यह [राजा] समरसमरस [युद्ध में एकरस] है, इत्यादि में पहिले बार के [समर इन वर्णों के] सार्थक और दूसरे बार के[सम-रस को मिलाकर बने समर के] अनर्थक होने से ‘भिन्नार्थानां’ यह नही कहा जा सकता है, इसलिए [यमक के लक्षण में] ‘अर्थे सति’ यह कहा गया है। [सा अर्थात्] उसी रूप में [उसी क्रम से आवृत्ति] इससे ‘सरो रसः’ इस [भिन्न क्रम से की गयी आवृत्ति में यमक नहीं होता है। इसलिए इस] से भिन्नरूप से नहीं, अर्थात् उसी क्रम से स्थित [वर्णों की आवृत्ति यमक में होनी चाहिए]।
सरलभाषा में भावार्थ– जब किसी वाक्य या पंक्ति में एक ही शब्द बार-बार आए, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग-अलग हो, तो वहाँ यमक अलंकार होता है।
👉 यमक अलंकार से संबन्धित महत्वपूर्ण नियम एवं जानकारियाँ-
✅ (1) शब्द की पुनरावृत्ति अनिवार्य
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- एक ही शब्द कम से कम दो बार आना चाहिए।
- बिना पुनरावृत्ति के यमक नहीं बनता।
✅ (2) अर्थ भिन्न होना चाहिए
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- हर बार प्रयुक्त शब्द का अर्थ अलग-अलग होना चाहिए।
- यदि अर्थ समान हो, तो वह यमक नहीं माना जाएगा।
✅ (3) शब्द समान रूप में हो
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- शब्द का रूप (स्पेलिंग/उच्चारण) एक जैसा होना चाहिए।
- थोड़े बहुत परिवर्तन (जैसे विभक्ति) हो सकते हैं, पर पहचान वही रहे।
✅ (4) सौंदर्य और चमत्कार
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- यमक का उद्देश्य काव्य में चमत्कार उत्पन्न करना है।
- केवल पुनरावृत्ति से नहीं, बल्कि अर्थ के भेद से सौंदर्य आता है।
उदाहरण सहित समझें
उदाहरण-(अ)
👉 कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
🔍 अलंकार की पहचान:
👉 यहाँ “कनक” शब्द दो बार आया है: पहला “कनक” = सोना, दूसरा “कनक” = धतूरा (नशीला पौधा), अलग-अलग अर्थ होने के कारण यमक अलंकार है।
उदाहरण- (ब)
👉 नयन में नयन बसे।
🔍 अलंकार की पहचान:
👉 उपर्युक्त वाक्य में “नयन” शब्द दो बार आया है जो कि अलग-अलग अर्थ वाला है। पहला “नयन” = आँख, दूसरा “नयन” = प्रिय/सुंदर व्यक्ति। इस तरह दोनों नयन शब्दों का अलग-अलग अर्थ होने के कारण यहां यमक अलंकार है।
✅ निष्कर्ष:
👉 उपर्युक्त उदाहरणों में स्पष्ट है कि—
🔸कनक-कनक(अर्थ-भिन्न)
🔸 नयन-नयन (अर्थ-भिन्न)
✔ इन स्थानों पर यमक अलंकार है।
👉 अतः जहाँ एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो और हर बार उसका अर्थ अलग हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।